आयुष्मान योजना घोटाला: IGIMS में 3.5 साल का इलाज होगा ऑडिट
पटना: IGIMS में आयुष्मान योजना के तहत 45 लाख रुपये के घोटाले की जांच शुरू, छह सदस्यीय टीम ने रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा जब्त कर इलाज की ऑडिट का फैसला किया।
पटना के इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत 45 लाख रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू हो गई है। इस मामले में छह सदस्यीय जांच टीम ने अस्पताल के रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा जब्त कर लिया है। जांच टीम ने पिछले 3.5 साल के इलाज का ऑडिट करने का फैसला किया है।
आयुष्मान योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाता है। ऐसे में 45 लाख रुपये के घोटाले की खबर ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच का मकसद है कि पता लगाया जाए कि क्या अस्पताल में इलाज के नाम पर गलत तरीके से धन का दुरुपयोग किया गया है या नहीं।
इस जांच की वजह से IGIMS में इलाज कराने वाले मरीजों को थोड़ी असुविधा हो सकती है क्योंकि रिकॉर्ड की छानबीन और डेटा की जांच के कारण कुछ प्रक्रियाएं धीमी पड़ सकती हैं। वहीं, यदि घोटाला प्रमाणित होता है, तो इससे आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं में सुधार की संभावना बढ़ेगी। इससे भविष्य में मरीजों को अधिक पारदर्शी और बेहतर सेवा मिल सकेगी।
जांच टीम ने अस्पताल के सभी संबंधित दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त कर लिए हैं। अब वे इन सबका विश्लेषण कर घोटाले के असली कारणों और जिम्मेदारों की पहचान करेंगे। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला देश में स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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