चैती छठ पर्व: नहाय-खाय से शुरू हुआ लोक आस्था का त्योहार

गया में चैती छठ का महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ, जो लोक आस्था का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।

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चैती छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से

गया में चैती छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हुई। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। चैती छठ लोक आस्था का एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है, जो सूर्य देव की पूजा और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

नहाय-खाय का महत्व

नहाय-खाय छठ पर्व का पहला दिन होता है, जिसमें व्रती स्नान करके शुद्धि प्राप्त करते हैं और शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। इसे व्रत के लिए शरीर और मन को साफ करने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रती सादा और शुद्ध भोजन करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से तिल, चावल, दाल और हरी सब्जियां शामिल होती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम माना जाता है।

लोक आस्था और सामाजिक प्रभाव

चैती छठ लोक आस्था का त्योहार होने के कारण इसे बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और प्रकृति के संरक्षण की कामना करते हैं। नहाय-खाय के बाद चार दिन तक व्रत और पूजा का क्रम चलता है, जो समुदाय में एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।

उपभोक्ताओं पर प्रभाव

इस पर्व के दौरान बाजारों में विशेष खाद्य सामग्री की मांग बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, व्रत रखने वाले लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक होते हैं, क्योंकि यह पर्व संयम और पोषण पर जोर देता है।

इस प्रकार, चैती छठ का नहाय-खाय पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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प्रश्न 1: चैती छठ पर्व की शुरुआत किस दिन से होती है?


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