बिहार में शराब तस्करी के कोडवर्ड्स और अवैध कारोबार की सच्चाई
बिहार में शराबबंदी के बाद भी 'सोनपापड़ी', 'प्योर मिल्क' जैसे कोडवर्ड से अवैध शराब पहुंचाई जा रही है। 30,000 करोड़ की छुपी अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
© Image credit: : नवभारत टाइम्स
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। तस्कर और विक्रेता अब नए-नए कोडवर्ड्स का इस्तेमाल कर अपने कारोबार को छुपा रहे हैं। जैसे 'सोनपापड़ी', 'प्योर मिल्क' जैसे नामों से शराब की आपूर्ति की जा रही है। यह तरीका पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए अपनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में शराब तस्करी की छुपी हुई अर्थव्यवस्था लगभग 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह रकम राज्य की आधिकारिक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। अवैध शराब कारोबार से होने वाली कमाई में से कई हिस्से अपराधी गुटों और भ्रष्ट अधिकारियों तक पहुंच रहे हैं।
शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की उपलब्धता से नशे की लत बढ़ती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इसके अलावा, नकली और मिलावटी शराब के कारण लोगों की जान को खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन की ओर से लगातार छापेमारी की जा रही है, लेकिन तस्करों के नए तरीके इसे रोकने में बाधा बन रहे हैं।
सरकार ने इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं, जैसे विशेष पुलिस दल बनाना और निगरानी बढ़ाना। लेकिन तस्करी के नए कोडवर्ड्स और नेटवर्क के कारण समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है। इसके लिए बेहतर तकनीकी निगरानी और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है।
इस स्थिति में, बिहार में शराबबंदी के नियमों का सही तरीके से पालन और अवैध कारोबार पर कड़ी कार्रवाई ही इस समस्या से निपटने का एकमात्र रास्ता माना जा रहा है।
News Source: : नवभारत टाइम्स
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