ईरान पर US, UN और EU के प्रतिबंधों का पूरा विवरण
2015 में JCPOA डील के बाद UN ने ईरान पर सैंक्शन्स हटाने का प्लान बनाया था, लेकिन 2018 में ट्रंप ने डील छोड़ दी। ईरान ने भी शर्तें नहीं मानी और पिछले साल UN ने फिर सैंक्शन्स लगाई।
US-UN के फैसले से tension बढ़ी 🔥
ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का इतिहास और वर्तमान स्थिति काफी जटिल है। 2015 में ईरान और छह प्रमुख देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ जिसे JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) कहा गया। इसके तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की शर्तें मानीं, और बदले में संयुक्त राष्ट्र (UN), अमेरिका (US) और यूरोपीय संघ (EU) ने उस पर लगे कई प्रतिबंध हटाने का वादा किया।
हालांकि, 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए। ईरान ने भी JCPOA की शर्तों का पालन करना बंद कर दिया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के कारण, संयुक्त राष्ट्र ने भी 2022 में ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान को परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के लिए दबाव में रखना है। यूरोपीय संघ ने भी अमेरिका के साथ मिलकर कई आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध जारी रखे हैं।
इन प्रतिबंधों का असर सीधे तौर पर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। तेल निर्यात में कमी, विदेशी निवेश में गिरावट और महंगाई बढ़ने जैसी समस्याएं आम जनता को प्रभावित कर रही हैं। साथ ही, वैश्विक बाजार में ईरानी तेल की सप्लाई में बाधा आई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है।
इस तरह, ईरान पर लगे प्रतिबंध न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव डालते हैं।
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