2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET से छूट की मांग
रोहतास जिले के जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने हाल ही में सांसद मनोज राम भारती को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उन्होंने 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट देने की मांग की है। साथ ही, इस संबंध में हुए किसी भी संशोधन को वापस लेने की भी अपील की गई है।
टीईटी से छूट क्यों जरूरी है?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। लेकिन 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट देने की मांग इसलिए उठी है क्योंकि वे पहले से ही सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं और उनकी नियुक्ति सरकारी मानकों के अनुसार हुई है। उनका कहना है कि उन्हें टीईटी के लिए दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
संशोधन वापस लेने की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि हाल में हुए कुछ संशोधन शिक्षकों के हित में नहीं हैं। ये संशोधन पुराने शिक्षकों के लिए अतिरिक्त बोझ और अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। इसलिए, संघ ने सांसद से आग्रह किया है कि वे इस मामले को सरकार के समक्ष उठाएं और आवश्यक कदम उठाएं।
शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव
अगर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलती है, तो इससे उनके मनोबल में सुधार होगा और वे अपने काम में और अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। इससे शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहेगी। दूसरी ओर, यह निर्णय शिक्षा गुणवत्ता पर भी असर डाल सकता है, इसलिए इसे संतुलित तरीके से देखना आवश्यक है।
इस मामले में आगे क्या कदम होंगे, यह सरकार की नीति और सांसद द्वारा उठाए गए प्रयासों पर निर्भर करेगा। फिलहाल शिक्षक संघ की यह मांग शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।


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