FPI ने मई में निकाले ₹27000 करोड़, भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली जारी
मई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से ₹27000 करोड़ से ज्यादा निकाले हैं। लगातार बिकवाली और चालू खाते के घाटे से रुपये पर दबाव बढ़ा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रुपये की कमजोरी और बढ़ सकती है।
FPI selling ने बढ़ाया pressure 🔥
मई महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹27000 करोड़ की निकासी की है। यह लगातार दूसरी बार है जब विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में निवेश वापस लिया है। इस बिकवाली से बाजार में दबाव बना हुआ है और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विदेशी निवेशकों की यह निकासी कई कारणों से हो रही है। सबसे बड़ा कारण है भारत के चालू खाते में बढ़ता घाटा। चालू खाते का घाटा बढ़ने से विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है, जिससे रुपये की कीमत कमजोर होती है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भी रुपये पर दबाव डाल रही है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे रुपये की कमजोरी को बढ़ावा देती है।
विदेशी निवेशकों की निकासी से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इससे बाजार के प्रमुख सूचकांक कमजोर हुए हैं और निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है। घरेलू निवेशकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, रुपये की कमजोरी से आयात महंगा होगा, जो महंगाई को बढ़ा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर चालू खाते का घाटा और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। इससे विदेशी निवेशकों की निकासी जारी रह सकती है। सरकार और रिजर्व बैंक को इस स्थिति पर नजर रखनी होगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
इसलिए, निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी है और बाजार की चाल पर ध्यान देना चाहिए। विदेशी निवेशकों की निकासी और रुपये की कमजोरी के कारण आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
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