मिडिल ईस्ट में जंग के बीच जयशंकर ने ईरान के उपविदेश मंत्री से की अहम मुलाकात
खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही ईरान के भड़काऊ बयानों, अजरबैजान पर ड्रोन हमलों और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुकने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के उपविदेश मंत्री के साथ एक अहम मुलाकात की है। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा को भी प्रभावित किया है।
जयशंकर और ईरानी उपविदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना था। भारत की यह कोशिश है कि वह मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने में भूमिका निभाए। खासकर जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है, तब यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
ईरान के भड़काऊ बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके अलावा अजरबैजान पर ड्रोन हमलों और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुकने से क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण जल मार्ग है, जिससे तेल और अन्य जरूरी सामान का परिवहन होता है। यहां की स्थिति खराब होने से वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता आ सकती है।
इस संघर्ष का सीधा असर भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों पर पड़ सकता है। भारत खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, इसलिए यहां की सुरक्षा भारत के लिए भी जरूरी है। जयशंकर की यह मुलाकात भारत की कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है, जिससे भारत क्षेत्रीय शांति के लिए अपना योगदान देना चाहता है।
इस बीच, सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद की जा रही है ताकि मिडिल ईस्ट में स्थिरता कायम रहे।
News Source: : AajTak
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