धुरंधर-2 पर जावेद अख्तर का जवाब: प्रचार फिल्मों में क्या गलत?
रणवीर सिंह और आदित्य धर की फिल्म धुरंधर-2 को प्रोपेगैंडा कहे जाने पर जावेद अख्तर ने कहा, प्रचार फिल्मों में गलत क्या है?
हाल ही में रणवीर सिंह और आदित्य धर की फिल्म धुरंधर-2 को लेकर एक विवाद सामने आया है। कुछ आलोचकों ने इस फिल्म को प्रचार फिल्म बताया, जिससे विवाद और बहस शुरू हो गई। इस पर मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रचार फिल्मों में क्या गलत है और इसे नकारात्मक रूप में देखना उचित नहीं है।
धुरंधर-2 फिल्म को कुछ लोगों ने राजनीतिक या सामाजिक प्रचार का हिस्सा बताया। उनका मानना है कि फिल्म में किसी खास एजेंडा को बढ़ावा दिया गया है, जो दर्शकों के लिए पक्षपातपूर्ण हो सकता है। हालांकि, फिल्म के निर्माता और कलाकारों ने इसे केवल मनोरंजन और कहानी के रूप में पेश किया है।
जावेद अख्तर ने इस मामले में कहा कि प्रचार फिल्मों का इतिहास पुराना है और यह कई बार सकारात्मक बदलाव लाने का जरिया भी बनी हैं। उन्होंने बताया कि फिल्में समाज में जागरूकता फैलाने और महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करने का माध्यम होती हैं। इसलिए, प्रचार फिल्मों को नकारात्मक रूप में देखना सही नहीं होगा।
फिल्मों को लेकर इस तरह की बहस का सीधा असर दर्शकों पर पड़ता है। जब कोई फिल्म प्रचार के तौर पर देखी जाती है, तो दर्शकों की उम्मीदें और समझ बदल जाती हैं। इससे फिल्म की आलोचना या सराहना दोनों पर असर पड़ता है। इस विवाद ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि फिल्मों में संदेश और मनोरंजन के बीच संतुलन कैसे होना चाहिए।
अंत में, यह स्पष्ट है कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का भी हिस्सा हैं। धुरंधर-2 पर चल रही बहस इस बात को और भी गहराई से समझने का मौका देती है।
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