झारखंड में शराबबंदी की संभावना, हेमंत सोरेन सरकार ने दी शर्त
बिहार के बाद झारखंड में भी शराबबंदी को लेकर चर्चा तेज हुई है। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2 लाख करोड़ रुपए की बकाया राशि मिलने पर ही इस विषय पर विचार होगा।
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झारखंड सरकार ने राज्य में शराबबंदी को लेकर नई शर्त रखी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि केंद्र सरकार से 2 लाख करोड़ रुपए की बकाया राशि मिलने के बाद ही इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। यह बयान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने दिया है, जिससे राज्य में शराबबंदी की चर्चा फिर से तेज हो गई है।
शराबबंदी का मुद्दा सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। बिहार में पहले ही शराबबंदी लागू है, जिससे झारखंड में भी इस कदम को लेकर दबाव बढ़ा है। सरकार का मानना है कि शराबबंदी से नशाखोरी कम होगी और सामाजिक समस्याओं में कमी आएगी। हालांकि, शराब से होने वाले राजस्व का नुकसान भी एक बड़ा सवाल है।
झारखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य को 2 लाख करोड़ रुपए की बकाया राशि दिए जाने पर ही शराबबंदी की योजना पर आगे बढ़ा जाएगा। यह राशि राज्य के विकास और सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी है। सरकार का कहना है कि बिना आर्थिक मदद के शराबबंदी लागू करना राज्य की वित्तीय स्थिति पर भारी पड़ सकता है।
अगर झारखंड में शराबबंदी लागू होती है, तो इससे सामाजिक सुधार की उम्मीद है। नशे से जुड़ी समस्याओं में कमी आएगी और परिवारों की स्थिति बेहतर होगी। वहीं, शराब उद्योग से जुड़े लोग और सरकार को राजस्व घाटा उठाना पड़ सकता है। इसलिए सरकार ने आर्थिक सहायता को शर्त के रूप में रखा है ताकि शराबबंदी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
इस तरह, झारखंड में शराबबंदी की दिशा में कदम उठाने से पहले आर्थिक और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। राज्य सरकार की यह शर्त इस बात को दर्शाती है कि शराबबंदी केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक भी है।
News Source: : Live Hindustan
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