झारखंड में 6 महीने से बकाया मानदेय के कारण मनरेगा कर्मी सड़कों पर
झारखंड के मनरेगा कर्मियों ने 6 महीने से बकाया वेतन न मिलने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। करीब 5000 कर्मी सांकेतिक हड़ताल में शामिल हुए, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं पर असर पड़ा है।
© Image credit: : प्रभात खबर
झारखंड के मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कर्मी पिछले 6 महीनों से अपने मानदेय का भुगतान न होने के कारण सड़कों पर उतर आए हैं। करीब 5000 से अधिक कर्मी इस समस्या को लेकर सांकेतिक हड़ताल में शामिल हुए हैं। इस हड़ताल का असर सीधे ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ रहा है।
मनरेगा कर्मियों का मानदेय पिछले छह महीने से बकाया है और वेतन न मिलने के कारण वे अपने परिवारों के खर्चों को भी पूरा करने में असमर्थ हो गए हैं। इस वजह से उन्होंने राज्य के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी कर्मी अपने वेतन की तत्काल मांग कर रहे हैं ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें।
मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार उपलब्ध कराना और आर्थिक सहायता देना है। जब कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिलता, तो इससे योजना की प्रभावशीलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वेतन बकाया रहने से मनरेगा के तहत चल रही विभिन्न विकास परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास धीमा पड़ रहा है।
वेतन न मिलने की वजह से मनरेगा कर्मी काम ठप करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार की उपलब्धता कम हो रही है। इससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी हो रही है। सरकार और संबंधित विभागों से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालेंगे ताकि योजना सुचारू रूप से चल सके और ग्रामीण विकास की गति बनी रहे।
News Source: : प्रभात खबर
Continue with Google
Advertisements