इंटरनेट पर खुशियों की खोज में युवा हो रहे मानसिक रूप से कमजोर: जेपी यूनिवर्सिटी रिपोर्ट
जेपी यूनिवर्सिटी के सर्वे में 18 से 25 साल के 5.6 लाख युवाओं पर शोध किया गया, जिसमें शहर और गांव दोनों के युवा शामिल थे। जनवरी से मार्च तक चले इस सर्वे में युवाओं की इंटरनेट उपयोग से जुड़ी मानसिक स्थिति पर चिंता जताई गई।
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जेपी यूनिवर्सिटी ने हाल ही में एक विस्तृत सर्वे किया है जिसमें 18 से 25 साल के लगभग 5.6 लाख युवाओं को शामिल किया गया। इस सर्वे में शहर और गांव दोनों क्षेत्रों के युवा शामिल थे। जनवरी से मार्च 2024 तक चले इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य युवाओं के इंटरनेट उपयोग और उनकी मानसिक स्थिति के बीच संबंध को समझना था।
रिपोर्ट में यह पाया गया है कि इंटरनेट पर खुशी और संतुष्टि की तलाश करते हुए कई युवा मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। लगातार सोशल मीडिया का उपयोग, ऑनलाइन गेमिंग, और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताने से उनमें तनाव, चिंता और अकेलेपन की भावना बढ़ रही है। खासतौर पर वे युवा जो सोशल मीडिया पर दूसरों की तुलना में खुद को कमतर महसूस करते हैं, उनमें आत्मसम्मान की कमी और अवसाद के लक्षण देखने को मिले हैं।
आज के डिजिटल युग में इंटरनेट युवाओं के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि यह जानकारी और मनोरंजन का स्रोत है, लेकिन इसके दुष्प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जेपी यूनिवर्सिटी की यह रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि इंटरनेट का असंतुलित उपयोग युवाओं की मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
इस रिपोर्ट के आधार पर यह जरूरी हो जाता है कि युवा इंटरनेट का उपयोग संतुलित तरीके से करें और अपनी मानसिक सेहत का ध्यान रखें। अभिभावकों, शिक्षकों और नीति निर्माताओं को भी चाहिए कि वे इस विषय पर जागरूकता बढ़ाएं और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर समर्थन प्रणाली विकसित करें।
इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि डिजिटल दुनिया में खुशियों की खोज करते हुए युवाओं को मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे समझना और संबोधित करना आवश्यक है।
News Source: : Live Hindustan
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