मनरेगा में बनी पुलिया बिना रास्ते के, पूर्वी चंपारण में सवाल

पताही में मनरेगा योजना से बनी 8 लाख की पुलिया के सामने कोई एप्रोच रोड नहीं है। पीओ जांच में मामला सामने आया, अब फाइल, एमबी और भुगतान की जांच कर रिपोर्ट भेजी जाएगी।

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पूर्वी चंपारण में मनरेगा की पुलिया पर सवाल

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड में मनरेगा योजना के तहत बनी एक पुलिया के सामने कोई एप्रोच रोड नहीं होने का मामला सामने आया है। करीब 8 लाख रुपये की लागत से बनी इस पुलिया का उपयोग करने के लिए रास्ता न होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

क्या है मामला?

मनरेगा योजना के तहत बनी इस पुलिया का मकसद ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना था। लेकिन पुलिया के सामने कोई एप्रोच रोड न होने के कारण इसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा पा रहा है। इस बात की शिकायत मिलने पर पीओ (प्रोजेक्ट ऑफिसर) ने जांच शुरू कर दी है। जांच में फाइल, एमबी (मेजरिंग बुक) और भुगतान से जुड़ी कागजी कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।

मामले की जांच क्यों जरूरी है?

मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन है। ऐसे में योजना के तहत बने बुनियादी ढांचे का सही उपयोग होना जरूरी है। अगर पुलिया के सामने रास्ता नहीं है तो इसका मतलब योजना के कार्यान्वयन में कहीं न कहीं कमी या लापरवाही हुई है। जांच से यह पता चलेगा कि निर्माण कार्य में कहां गलती हुई और जिम्मेदार कौन हैं।

स्थानीय लोगों पर प्रभाव

इस पुलिया का उपयोग न होने से स्थानीय ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। जांच पूरी होने के बाद उचित कदम उठाने की उम्मीद है ताकि पुलिया का सही उपयोग हो सके और ग्रामीणों को लाभ मिल सके।

इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई से ही यह साफ होगा कि मनरेगा योजना के तहत किए गए कामों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहेगी या नहीं।

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प्रश्न 1: पूर्वी चंपारण में मनरेगा पुलिया पर क्या समस्या है?


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