LPG संकट में दिल्ली के मोती महल ने 40 साल बाद कोयले पर खाना पकाना शुरू किया
दिल्ली में बढ़ते कमर्शियल LPG संकट के चलते प्रसिद्ध मोती महल रेस्टोरेंट को 40 साल बाद कोयले की आंच पर खाना बनाना पड़ा है। अब यहां की खास डिशेज कोयले पर तैयार की जा रही हैं।
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दिल्ली के मशहूर मोती महल रेस्टोरेंट ने 40 साल बाद कोयले पर खाना पकाना शुरू कर दिया है। यह बदलाव बढ़ती हुई LPG की कमी और कीमतों में उछाल के कारण हुआ है। रेस्टोरेंट के लिए यह एक बड़ा कदम है क्योंकि पिछले दशकों से यहां खाना गैस पर ही पकाया जाता रहा है।
मोती महल ने LPG की उपलब्धता में समस्या और बढ़ती लागत को देखते हुए कोयले का इस्तेमाल फिर से शुरू किया है। यह बदलाव खासतौर पर उनकी पारंपरिक और लोकप्रिय डिशेज के लिए किया गया है, ताकि स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रहे। कोयले पर खाना पकाने से खाना बनाने की प्रक्रिया में थोड़ी मेहनत और समय बढ़ जाता है, लेकिन इससे स्वाद में भी एक खास परंपरागत खुशबू आती है।
LPG की कमी और महंगाई ने कई रेस्टोरेंट्स को प्रभावित किया है। मोती महल जैसे प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट का कोयले पर वापस जाना इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। इससे यह भी पता चलता है कि रेस्टोरेंट उद्योग को ऊर्जा के विकल्पों पर विचार करना पड़ रहा है।
ग्राहकों को अब यहां की खास डिशेज कोयले की आंच पर तैयार होते देखना एक नया अनुभव होगा। हालांकि खाना पकाने में समय थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन स्वाद में सुधार की उम्मीद है। उद्योग के लिए यह एक संकेत है कि ऊर्जा संकट के चलते पारंपरिक तरीकों को अपनाना पड़ सकता है।
मोती महल का यह कदम अन्य रेस्टोरेंट्स के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जो ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। यह स्थिति सरकार और संबंधित विभागों के लिए भी चिंता का विषय है कि वे इस संकट का समाधान जल्दी निकालें।
News Source: : ABP News
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