प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद भी स्वास्थ्य केंद्रों में फायर ऑडिट नहीं

मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद भी किसी भी मॉडल अस्पताल या पीएचसी-सीएचसी में फायर ऑडिट नहीं हुआ। डीएम कुमार गौरव ने निरीक्षण में लापरवाही पाते हुए तुरंत फायर ऑडिट और ट्रेनिंग का आदेश दिया।

लापरवाही देख shock होगा 😡

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प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद भी फायर ऑडिट नहीं

मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भयानक अग्निकांड के बाद भी जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में फायर ऑडिट नहीं कराया गया है। यह घटना स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।

क्या है फायर ऑडिट और इसकी जरूरत

फायर ऑडिट का मतलब होता है किसी भी इमारत या संस्था की आग से सुरक्षा की जांच करना। इसमें फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति, आपातकालीन निकास मार्ग, और कर्मचारियों की ट्रेनिंग शामिल होती है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर यह बेहद जरूरी होता है ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

डीएम ने की कड़ी कार्रवाई

मुजफ्फरपुर के जिला मजिस्ट्रेट कुमार गौरव ने स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करने के बाद पाया कि कई मॉडल अस्पतालों और पीएचसी-सीएचसी में फायर ऑडिट नहीं हुआ है। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया और तुरंत सभी केंद्रों में फायर ऑडिट कराने और कर्मचारियों को फायर सेफ्टी ट्रेनिंग देने का आदेश दिया है।

इसका असर आम जनता पर

स्वास्थ्य केंद्रों में फायर सेफ्टी की कमी मरीजों और उनके परिजनों के लिए खतरा बन सकती है। अग्निकांड जैसी घटनाएं न केवल जानलेवा होती हैं, बल्कि अस्पतालों की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं। फायर ऑडिट और ट्रेनिंग से आपातकालीन स्थिति में बेहतर प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी, जिससे जान-माल की सुरक्षा बढ़ेगी।

यह घटना स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि वे सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लें और समय-समय पर आवश्यक जांच और प्रशिक्षण सुनिश्चित करें।

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प्रश्न 1: प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद क्या नहीं हुआ?


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