रुपये की गिरावट पर RBI को पनगढ़िया की सलाह, 100 रुपये को न बनाएं आधार
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने RBI से कहा है कि डॉलर के मुकाबले 100 रुपये के स्तर को लेकर हस्तक्षेप न करें और बाजार के हिसाब से रुपये को गिरने दें।
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नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सुझाव दिया है कि वह डॉलर के मुकाबले रुपये के 100 के स्तर को लेकर हस्तक्षेप न करे। उनका कहना है कि बाजार की ताकत के अनुसार रुपये को गिरने देना चाहिए और इसे एक निश्चित मूल्य स्तर पर रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
पनगढ़िया ने यह बात तब कही जब भारतीय रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरकर करीब 100 के स्तर के करीब पहुंच गई। उन्होंने कहा कि RBI को रुपये को मजबूती देने के लिए कृत्रिम हस्तक्षेप करने की बजाय बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर स्थिति को संभालना चाहिए। उनका मानना है कि रुपये का मूल्य बाजार के नियमों के अनुसार ही तय होना चाहिए न कि किसी मनमाने स्तर पर।
रुपये की गिरावट का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, खासकर आयात पर निर्भरता रखने वाले क्षेत्रों में। लेकिन पनगढ़िया का मानना है कि RBI का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा बाजार में स्वाभाविक संतुलन बना रहे। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बना रहता है और मुद्रा बाजार में अनावश्यक अस्थिरता से बचा जा सकता है।
रुपये की गिरावट से आयात महंगा हो सकता है, जिससे घरेलू बाजार में कुछ वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। वहीं, निर्यातक इससे लाभ उठा सकते हैं क्योंकि उनकी वस्तुएं विदेशों में सस्ती पड़ती हैं। RBI के हस्तक्षेप न करने से मुद्रा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन अस्थिरता के कारण कुछ समय के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
इसलिए, पनगढ़िया की सलाह बाजार की प्राकृतिक प्रवृत्ति को समझते हुए दी गई है, जो भारतीय मुद्रा नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण विचार हो सकती है।
News Source: : Hindustan Hindi News
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