कतर ने कहा- युद्ध 2-3 हफ्ते तक चला तो होगी भारी तबाही, भारत ने तैयार किया प्लान B
कतर को युद्ध के कारण अपने बड़े एलएनजी संयंत्र रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में एलएनजी उत्पादन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है, जिससे वैश्विक गैस आपूर्ति पर चिंता बढ़ गई है।
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कतर ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यदि युद्ध 2-3 हफ्ते तक चलता रहा तो इससे बड़ी तबाही हो सकती है। कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) संयंत्र को युद्ध के कारण अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इस बंदी से वैश्विक गैस आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।
रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी, जो कतर का सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादन केंद्र है, युद्ध की वजह से अपनी उत्पादन क्षमता को रोकने पर मजबूर हो गया है। यह संयंत्र विश्व के एलएनजी निर्यात में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संयंत्र की अस्थायी बंदी से विश्व बाजार में गैस की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति में कटौती से कई देशों की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं। खासकर भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा एलएनजी पर निर्भर करता है। कतर की इस स्थिति ने भारत को आपूर्ति में संभावित खतरों से निपटने के लिए 'प्लान B' तैयार करने पर मजबूर कर दिया है।
भारत ने कतर की एलएनजी आपूर्ति में संभावित व्यवधान के मद्देनजर वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके अलावा, देश ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और ऊर्जा बचत के उपायों को तेज करने पर भी काम शुरू कर दिया है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
यदि कतर की एलएनजी आपूर्ति में लंबी अवधि तक बाधा बनी रहती है, तो भारत में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे घरेलू और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी और उद्योगों की उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार और उद्योग जगत इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
News Source: : AajTak
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