चांदी की कीमतों में भारी गिरावट: युद्ध के बीच ₹20,000 तक कमी क्यों आई?
मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद चांदी की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार और MCX पर करीब 10% और ₹20,000 तक की गिरावट दर्ज हुई है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण चांदी जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश कम आकर्षक हो रहे हैं। सोने की कीमतों में भी कमी देखी गई है। निवेशकों को अल्पकाल में सतर्क रहने और दीर्घकाल में खरीदारी का मौका समझने की सलाह दी जा रही है।
स्रोत: : Jagran
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बावजूद चांदी की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार और MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर करीब 10% की भारी गिरावट देखी गई है। इसका असर रुपये में भी पड़ा है, जहां चांदी की कीमतों में लगभग ₹20,000 तक की कमी आई है। यह स्थिति निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो चांदी जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं क्योंकि निवेशक उच्च ब्याज वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे चांदी की मांग कम हो जाती है।
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है। हालांकि सोना पारंपरिक रूप से संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड के बढ़ने से सोने की कीमतें भी दबाव में आ गई हैं।
वर्तमान स्थिति में निवेशकों को अल्पकाल में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। बाजार की अस्थिरता को देखते हुए जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। वहीं, कई विशेषज्ञ इसे दीर्घकाल में खरीदारी का अच्छा अवसर मान रहे हैं क्योंकि चांदी की कीमतें भविष्य में फिर से बढ़ सकती हैं।
इसलिए, निवेशकों को बाजार की चाल पर नजर रखनी चाहिए और समझदारी से निर्णय लेना चाहिए।
स्रोत: : Jagran
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