गणगौर पूजा से शुरू हुआ जयपुर में पारंपरिक त्योहार, युवतियों ने की ईसर-गणगौर की आराधना
जयपुर में होली के बाद गणगौर पर्व की परंपरागत शुरुआत हो गई है। विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के साथ ईसर-गणगौर की पूजा कर रही हैं। सुबह बगीचों से फूल चुनकर और लोकगीतों के साथ सामूहिक पूजा से शहर का माहौल भक्तिमय बन गया है।
© Image credit: : Dainik Navajyoti
जयपुर में होली के बाद पारंपरिक गणगौर पर्व की शुरुआत हो गई है। यह त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाता है और इसे ईसर-गणगौर की पूजा के रूप में जाना जाता है। विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस पूजा में भाग लेती हैं।
सुबह के समय महिलाएं बगीचों से ताजे फूल चुनती हैं और लोकगीतों के साथ सामूहिक रूप से पूजा करती हैं। इस दौरान वे भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती हैं, जिन्हें ईसर-गणगौर कहा जाता है। यह पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक एकता का भी माध्यम बनती है।
गणगौर पूजा का जयपुर में खास महत्व है क्योंकि यह त्योहार महिलाओं की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, यह त्योहार स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में मदद करता है। शहर के विभिन्न हिस्सों में इस पूजा के दौरान उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है, जो लोगों के बीच एकता और सौहार्द बढ़ाता है।
इस त्योहार के दौरान बाजारों में फूल, पूजा सामग्री और पारंपरिक वस्त्रों की मांग बढ़ जाती है। इससे स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक लाभ होता है। साथ ही, शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेलों का आयोजन भी होता है, जो लोगों को मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव का अवसर प्रदान करता है।
इस प्रकार, जयपुर में गणगौर पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी अहम हिस्सा है।
News Source: : Dainik Navajyoti
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