वट सावित्री व्रत: सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए पूजा की

बिहारशरीफ में सुहागिन महिलाओं ने शुक्रवार सुबह वट वृक्ष के पास पति की दीर्घायु और खुशहाली के लिए वट सावित्री व्रत श्रद्धा से रखा।

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वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व

बिहारशरीफ में शुक्रवार को वट सावित्री व्रत बड़े ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष के पास पहुंचकर अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए पूजा करती हैं। यह व्रत पारंपरिक रूप से हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और महिलाओं की आस्था का प्रतीक है।

व्रत की पूजा विधि और परंपरा

सुबह के समय महिलाएं वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा करती हैं। वे सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं, जो इस व्रत की पौराणिक कहानी है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर उसके तले जल चढ़ाती हैं और पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और पूरे दिन व्रत का पालन करती हैं।

यह व्रत क्यों महत्वपूर्ण है?

वट सावित्री व्रत का मुख्य उद्देश्य पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करना है। यह व्रत महिलाओं की समर्पण भावना और परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है। इसके अलावा, यह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महिलाओं को एकजुट करता है और उनकी आस्था को मजबूत बनाता है।

इस व्रत का महिलाओं पर प्रभाव

वट सावित्री व्रत महिलाओं के लिए आत्मविश्वास और मानसिक शांति का स्रोत होता है। यह उन्हें अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है। साथ ही, इस व्रत के दौरान महिलाएं समाज में अपनी भूमिका और परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों को समझती हैं।

इस प्रकार, बिहारशरीफ में मनाया गया वट सावित्री व्रत न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह महिलाओं की आस्था और परिवार की खुशहाली का प्रतीक भी है।

News Source: : प्रभात खबर

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प्रश्न 1: वट सावित्री व्रत किसके लिए मनाया जाता है?


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