अमेरिकी फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदा भारत ने? जानिए वजह
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल की सैन्य गतिविधियों के बीच भारत में एक बार फिर चर्चा शुरू हुई है कि वाशिंगटन के साथ डिफेंस संबंध मजबूत होने के बावजूद भारत अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने से क्यों बचता रहा है।
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भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है। इसके बावजूद, भारत ने अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने में संकोच दिखाया है। यह सवाल मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल की सैन्य गतिविधियों के बीच और भी ज्यादा उठने लगा है।
भारत ने अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने से इसलिए बचा है क्योंकि उसकी प्राथमिकता अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विविध विकल्पों को बनाये रखना है। भारत ने रूस, फ्रांस और स्वदेशी विमान जैसे मिग, सुखोई, राफेल और तेजस को अपनी वायुसेना में शामिल किया है। इससे भारत को तकनीकी और रणनीतिक स्वतंत्रता मिलती है और किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है।
इसके अलावा, अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियों को लेकर भारत की अपनी विदेश नीति है जो संतुलित और गैर-पक्षपाती रहती है। भारत की कोशिश रहती है कि वह अपने रक्षा संबंधों को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के नजरिए से देखे।
इस रणनीति का सीधा असर यह है कि भारत की वायुसेना के पास विविध तकनीक और हथियार प्रणाली होती हैं, जो विभिन्न परिस्थितियों में काम आती हैं। इससे ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ता है। हालांकि, अमेरिकी फाइटर जेट के न होने से कुछ उन्नत तकनीक और सपोर्ट सिस्टम की कमी भी महसूस की जा सकती है।
फिर भी, भारत की रक्षा नीति में संतुलन बनाए रखना और अपने हितों के अनुसार निर्णय लेना ही प्राथमिकता है। इसलिए, अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने में देरी या बचाव को भारत की रणनीतिक सोच के रूप में देखा जाना चाहिए।
News Source: : News18 Hindi
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