सीतामढ़ी अस्पताल में करंट लगे युवक की आटा थेरेपी, डॉक्टर भी चौंके
सीतामढ़ी सदर अस्पताल में करंट लगने से घायल युवक के इलाज के दौरान परिजन आटा थेरेपी करते दिखे। डॉक्टरों ने इस अनोखे इलाज पर हैरानी जताई। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
सीतामढ़ी सदर अस्पताल में करंट लगने से घायल एक युवक के इलाज के दौरान परिजनों द्वारा आटा थेरेपी का प्रयोग किया गया, जो अस्पताल के डॉक्टरों के लिए हैरानी का विषय बना। यह घटना स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था और परंपरागत उपचार पद्धतियों के बीच के अंतर को उजागर करती है।
आटा थेरेपी एक पारंपरिक उपचार विधि है जिसमें आटे को चोट या घाव पर लगाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, इस पद्धति का वैज्ञानिक आधार नहीं है और इसे आधुनिक चिकित्सा में मान्यता प्राप्त नहीं है। परिजन इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं, खासकर तब जब मरीज की हालत गंभीर हो और तत्काल उचित इलाज न मिल पा रहा हो।
युवक की हालत गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों ने आटा थेरेपी को गैर-वैज्ञानिक और असामान्य बताया। उन्होंने कहा कि करंट लगने जैसी गंभीर स्थिति में तत्काल और उचित चिकित्सा सहायता आवश्यक होती है, न कि घरेलू उपचार।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पारंपरिक उपचारों का प्रचलन है, जो कभी-कभी मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकता है। सही और समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने पर ऐसे उपाय अपनाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि करंट लगने जैसी आपात स्थितियों में तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर आधुनिक चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। इससे मरीज की जान बचाई जा सकती है और जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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