झारखंड में 40% कैंसर मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाते हैं
झारखंड में कैंसर के बढ़ते मामले और इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता पर जमशेदपुर में चर्चा हुई। डॉ. अभय कुमार ने बताया कि देश में हर साल 14 लाख नए कैंसर केस सामने आते हैं। आधुनिक रोबोटिक सर्जरी और समय पर जांच से इस बीमारी को रोका जा सकता है।
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झारखंड में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हाल ही में जमशेदपुर में आयोजित एक चर्चा में यह सामने आया कि राज्य के लगभग 40% कैंसर मरीज इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। इस वजह से मरीजों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
चर्चा में शामिल विशेषज्ञ डॉ. अभय कुमार ने बताया कि पूरे देश में हर साल करीब 14 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय पर जांच और आधुनिक तकनीकों जैसे रोबोटिक सर्जरी का उपयोग किया जाए तो कैंसर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
झारखंड में कैंसर के इलाज के लिए सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को दूसरे बड़े शहरों जैसे दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जाना पड़ता है। इससे न केवल इलाज की लागत बढ़ जाती है, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों पर भी भारी दबाव पड़ता है।
इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में जाना मरीजों की जीवन गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इसके अलावा समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में बीमारी गंभीर हो सकती है। इस कारण स्थानीय स्तर पर बेहतर कैंसर उपचार सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ गई है।
झारखंड में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ इलाज के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास करना जरूरी है। इससे मरीजों को समय पर और आसान इलाज मिल सकेगा और उनकी जीवनशैली बेहतर होगी।
News Source: : प्रभात खबर
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