बिहार क्राइम में बदलाव: नीतीश राज की स्पीडी ट्रायल से एनकाउंटर तक
बिहार में अपराध नियंत्रण के तरीके बदले हैं। जहां नीतीश सरकार में तेज ट्रायल से अपराधी सजा पाते थे, वहीं सम्राट सरकार में एनकाउंटर की नीति ने पुलिस को ज्यादा सख्त बनाया है। जानिए इसके पीछे की वजह।
© Image credit: : नवभारत टाइम्स
बिहार में अपराध नियंत्रण के तरीके में हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। पहले जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार तेज ट्रायल के जरिए अपराधियों को जल्दी सजा दिलाने पर जोर देती थी, वहीं वर्तमान में सम्राट सरकार ने एनकाउंटर की नीति को अपनाकर पुलिस की कार्रवाई को और सख्त कर दिया है।
नीतीश कुमार के शासनकाल में अपराध नियंत्रण के लिए तेज ट्रायल को प्राथमिकता दी गई थी। इसका मकसद था कि अपराधी जल्द से जल्द कोर्ट में सजा पाएं ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी न हो। इस नीति से अपराधियों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई तेजी से होती थी और न्याय व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी थी।
वहीं, सम्राट सरकार ने एनकाउंटर नीति को अपनाकर पुलिस को अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का निर्देश दिया है। इस नीति के तहत पुलिस को अधिक अधिकार दिए गए हैं ताकि वे खतरनाक अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकें। इसका मकसद अपराध को जड़ से खत्म करना बताया जा रहा है।
इन बदलावों का सबसे बड़ा असर आम जनता और पुलिस व्यवस्था पर पड़ा है। तेज ट्रायल से जहां न्याय प्रक्रिया में तेजी आई थी, वहीं एनकाउंटर नीति ने पुलिस को अधिक सक्रिय और सख्त बनाया है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि पुलिस कार्रवाई में कानून का पालन हो और किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जाए।
इस बदलाव से यह साफ होता है कि बिहार सरकार अपराध नियंत्रण के लिए नए-नए तरीके अपना रही है। जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
News Source: : नवभारत टाइम्स
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