बिहार PDS घोटाला: 15 किमी दूर बच्ची के नाम से राशन निकाला गया
गया जिले में 10 साल की बच्ची के नाम पर मोहनपुर में बायोमेट्रिक के जरिए राशन निकासी हुई, जबकि बच्ची वहां कभी नहीं गई। इस घटना ने PDS सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
© Image credit: : प्रभात खबर
गया जिले के मोहनपुर इलाके में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां 10 साल की बच्ची के नाम पर बायोमेट्रिक प्रणाली का इस्तेमाल कर राशन निकाला गया। बच्ची का नाम तो राशन कार्ड में दर्ज था, लेकिन वह कभी भी मोहनपुर नहीं गई थी। यह मामला बिहार के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जानकारी के अनुसार, गया जिले की एक बच्ची के नाम से मोहनपुर में 15 किलोमीटर दूर राशन निकासी हुई। बच्ची की उम्र केवल 10 वर्ष है और उसने कभी भी उस इलाके का दौरा नहीं किया। इसके बावजूद वहां के राशन केंद्र पर बायोमेट्रिक मशीन के जरिए राशन की डिलीवरी कर दी गई। इस घटना ने PDS सिस्टम की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया की जांच की जरूरत को दर्शाया है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब और जरूरतमंद लोगों को उचित दाम पर राशन उपलब्ध कराने का एक अहम माध्यम है। जब इस प्रणाली में इस तरह की अनियमितताएं सामने आती हैं, तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जिन्हें वास्तव में राशन की जरूरत होती है। इस प्रकार के घोटाले से न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी कम होता है।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि PDS में सुधार की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके। उपभोक्ताओं को अपनी राशन कार्ड संबंधी जानकारी नियमित रूप से जांचनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए। सरकार को भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कर उचित कदम उठाने चाहिए।
यह मामला बिहार में PDS प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की उम्मीद की जा रही है।
News Source: : प्रभात खबर
Continue with Google
Advertisements