खीरे की खेती में फफूंद और वायरस से बचाव के घरेलू उपाय
जमुई में किसान साकेंद्र यादव ने नीम पत्ती, छाछ, गोबर खाद और राख से खीरे की फसल को फफूंद और वायरस से बचाया। जानिए उनके देसी नुस्खे।
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जमुई के किसान साकेंद्र यादव ने खीरे की खेती में फफूंद और वायरस से बचाव के लिए कुछ घरेलू उपाय अपनाए हैं, जो किसानों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने नीम की पत्तियां, छाछ, गोबर की खाद और राख का इस्तेमाल कर अपनी फसल को स्वस्थ रखा।
साकेंद्र यादव बताते हैं कि नीम की पत्तियां फफूंद और कीटों से बचाव में कारगर होती हैं। नीम के पत्तों का पेस्ट या पानी में उबालकर छिड़काव करने से फसल में रोग कम होते हैं। इसके अलावा, छाछ का छिड़काव भी फफूंद को रोकने में सहायक होता है।
गोबर की खाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। राख का उपयोग भी कीटों और फफूंद से बचाव के लिए किया जाता है। ये सभी उपाय रासायनिक दवाओं के बिना फसल को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
खेती में रासायनिक कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का अधिक उपयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपाय अपनाना किसानों के लिए फायदेमंद है। इससे लागत भी कम आती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है।
यह घरेलू तरीका छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि वे महंगे रासायनिक उत्पाद खरीदने में सक्षम नहीं होते। साकेंद्र यादव के अनुभव से पता चलता है कि इन उपायों से फसल की पैदावार में सुधार होता है और नुकसान कम होता है।
इस प्रकार, खीरे की खेती में फफूंद और वायरस से बचाव के लिए इन घरेलू उपायों को अपनाना एक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प माना जा सकता है।
News Source: : News18
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