बिहार राजनीति: लालू-नीतीश की किस्मत बदली VP सिंह सरकार में

1989-90 में केंद्र की गुटबाजी ने बिहार के नेता लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के करियर को नया मोड़ दिया। पांच महीने बाद VP सिंह ने नीतीश को मंत्री बनाया।

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बिहार राजनीति में 1989-90 का अहम मोड़

1989-90 के दौर में भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। खासकर बिहार के दो प्रमुख नेताओं लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा पर केंद्र सरकार की गुटबाजी का गहरा असर पड़ा। उस समय वीपी सिंह की सरकार केंद्र में थी, जिसने बिहार के इन नेताओं की किस्मत को नया दिशा दी।

VP सिंह सरकार में नीतीश कुमार को मंत्री पद

वीपी सिंह की सरकार ने लगभग पांच महीने के अंदर नीतीश कुमार को केंद्रीय मंत्री बनाया। यह कदम बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव था। नीतीश कुमार की यह नियुक्ति उनके राजनीतिक करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। वहीं, लालू प्रसाद यादव भी इस दौर में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण?

1989-90 के समय केंद्र सरकार में सत्ता संघर्ष और गुटबाजी ने बिहार के नेताओं के लिए नए अवसर खोले। नीतीश कुमार का मंत्री बनना उनके राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने वाला था। इससे बिहार की राजनीति में नए गठबंधन और रणनीतियों का विकास हुआ। लालू और नीतीश दोनों के करियर में यह दौर महत्वपूर्ण साबित हुआ क्योंकि इससे उनकी राष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई।

इसका प्रभाव आम जनता और राजनीति पर

इन घटनाओं ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दी। नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की सक्रियता से बिहार में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की उम्मीदें बढ़ीं। केंद्र सरकार में मंत्री पद मिलने से बिहार के विकास और संसाधनों पर भी ध्यान गया। आम जनता के लिए यह बदलाव राजनीतिक स्थिरता और बेहतर प्रतिनिधित्व का संकेत था।

इस तरह, 1989-90 की केंद्र सरकार की गुटबाजी ने बिहार के दो बड़े नेताओं की किस्मत को नया मोड़ दिया, जो आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीति को प्रभावित करता रहा।

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प्रश्न 1: 1989-90 में बिहार के किस नेता को केंद्रीय मंत्री बनाया गया?


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