मधुमेह में बार-बार दांत सड़ने से बढ़ती है परेशानी, तुरंत जांच कराएं
स्वस्थ शरीर के साथ दांतों का स्वस्थ रहना भी जरूरी है। मधुमेह न केवल किडनी और दिल को प्रभावित करता है, बल्कि दांत और मसूड़ों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ाता है। दंत विशेषज्ञ डॉ. वंदना गुप्ता के अनुसार, मधुमेह के मरीजों में मसूड़ों की बीमारी का खतरा तीन से पांच गुना ज्यादा होता है। अधिक शुगर से मसूड़ों में सूजन, खून आना और दांत कमजोर हो सकते हैं। इसलिए मुंह की साफ-सफाई और शुगर नियंत्रण जरूरी है।
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मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो न केवल शरीर के अंदरूनी अंगों को प्रभावित करती है, बल्कि दांत और मसूड़ों की सेहत पर भी बुरा असर डालती है। बार-बार दांत सड़ने की समस्या मधुमेह के मरीजों में आम देखी जाती है। यह समस्या इसलिए गंभीर होती है क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और दांतों की मजबूती कम हो जाती है।
दंत विशेषज्ञ डॉ. वंदना गुप्ता के अनुसार, मधुमेह के मरीजों में मसूड़ों की बीमारियां सामान्य से तीन से पांच गुना ज्यादा होती हैं। शरीर में अधिक शुगर होने से मसूड़ों में सूजन, खून आना और दांत कमजोर हो सकते हैं। यह स्थिति दांतों को जल्दी खराब कर सकती है और मुंह में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा देती है।
मधुमेह के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दांतों और मसूड़ों की देखभाल न करने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जो दांतों के गिरने तक का कारण बन सकता है। इसलिए मधुमेह के मरीजों के लिए दांतों की नियमित जांच और साफ-सफाई बेहद जरूरी है।
मधुमेह से पीड़ित लोग यदि दांतों की सही देखभाल नहीं करते हैं तो उन्हें बार-बार दांत सड़ने, मसूड़ों में दर्द और खून आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी खाने-पीने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और जीवन की गुणवत्ता घट सकती है। इसलिए शुगर नियंत्रण के साथ-साथ दांतों की सफाई पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
मधुमेह के मरीजों को चाहिए कि वे नियमित रूप से दांतों की जांच कराएं और मुंह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। साथ ही शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है ताकि दांतों और मसूड़ों की समस्याओं से बचा जा सके। समय पर इलाज और सावधानी से इन परेशानियों को कम किया जा सकता है।
News Source: : Jagran
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