आयरन की कमी से बढ़ता है अल्जाइमर का खतरा, जानें कारण

आयरन की कमी वाले लोगों में अल्जाइमर से जुड़े संकेत पहले से ज्यादा पाए गए हैं, जिससे डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है।

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आयरन की कमी और अल्जाइमर के बीच संबंध

हाल ही में हुए शोध में यह पाया गया है कि आयरन की कमी से अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ सकता है। आयरन की कमी वाले लोगों में मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे डिमेंशिया और अन्य मानसिक विकारों के लक्षण जल्दी दिखने लगते हैं। यह शोध इस बात को उजागर करता है कि आयरन का सही स्तर बनाए रखना मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है।

क्यों है यह अपडेट महत्वपूर्ण?

आयरन की कमी आमतौर पर थकान, कमजोरी और ध्यान केंद्रित करने में समस्या के रूप में जानी जाती है। लेकिन अब यह पता चला है कि इसका असर मस्तिष्क पर भी पड़ता है, खासकर बुजुर्गों में। आयरन की कमी से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जो न्यूरॉन्स के नुकसान का कारण बनती है। इससे अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

यूजर्स पर प्रभाव

जो लोग आयरन की कमी से पीड़ित हैं, उन्हें अपने आहार और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है। आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पालक, चुकंदर, दालें और मांसाहारी विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, समय-समय पर रक्त परीक्षण कराना भी जरूरी है ताकि आयरन का स्तर नियंत्रित रहे।

इस शोध से यह भी संकेत मिलता है कि अल्जाइमर रोग के जोखिम को कम करने के लिए आयरन की कमी को समय रहते पहचानना और उसका इलाज करना आवश्यक है। इससे न केवल मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

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प्रश्न 1: आयरन की कमी से कौन सा रोग बढ़ सकता है?


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