गेस्टेशनल डायबिटीज मेलाइटिस (जीडीएम) दिवस: प्रेगनेंसी में शुगर बढ़ने का खतरा और फास्ट फूड का असर
मुरादाबाद से खबर, गर्भावस्था में शुगर की बीमारी यानी गेस्टेशनल डायबिटीज मेलाइटिस (जीडीएम) तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट फूड का अधिक सेवन इस बीमारी को बढ़ावा दे रहा है, जिससे माताओं और बच्चों दोनों के लिए खतरे बढ़ रहे हैं।
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मुरादाबाद से आई खबर के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान शुगर की बीमारी, जिसे गेस्टेशनल डायबिटीज मेलाइटिस (जीडीएम) कहा जाता है, तेजी से बढ़ रही है। यह स्थिति खासतौर पर उन महिलाओं में देखी जा रही है जो प्रेगनेंसी के दौरान फास्ट फूड का अधिक सेवन करती हैं।
गेस्टेशनल डायबिटीज मेलाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में शुगर का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। यह स्थिति सामान्य डायबिटीज से अलग होती है और प्रेग्नेंसी के बाद अक्सर ठीक हो जाती है, लेकिन इसके कारण माताओं और बच्चों दोनों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड में उच्च मात्रा में शुगर, वसा और कैलोरी होती है, जो शरीर में शुगर के स्तर को बढ़ाने में सहायक होती है। गर्भवती महिलाओं द्वारा इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन गेस्टेशनल डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, फास्ट फूड की पौष्टिकता कम होने के कारण शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिलता, जिससे माताओं की सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जीडीएम से पीड़ित महिलाओं में प्री-इक्लेम्पसिया, प्रीमैच्योर डिलीवरी और सिजेरियन की जरूरत बढ़ सकती है। बच्चों में जन्म के समय अधिक वजन, सांस लेने में दिक्कत और भविष्य में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, इस बीमारी का समय पर पता लगाना और सही इलाज बेहद जरूरी है।
गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वे अपने खान-पान में संतुलन रखें और फास्ट फूड से बचें। नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें ताकि शुगर लेवल पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही पोषण और व्यायाम को अपनाना भी जरूरी है। इससे न केवल जीडीएम का खतरा कम होगा बल्कि मां और बच्चे दोनों की सेहत भी बेहतर बनी रहेगी।
News Source: : Hindustan Hindi News
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