गणेश पूजा में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आरती का महत्व और विधि
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत पर इस आरती का पाठ करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और भगवान गणेश की विशेष कृपा मिलती है।
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गणेश पूजा में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आरती का विशेष स्थान है। यह आरती संकष्टी चतुर्थी के दिन की जाती है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आरती भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है।
इस आरती का पाठ संकष्टी चतुर्थी के दिन शाम को चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है। पूजा स्थल को साफ-सुथरा कर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। दीपक जलाकर, फूल, फल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। आरती के दौरान भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आरती के मंत्रों और भजनों का उच्चारण होता है। यह आरती भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आरती का नियमित पाठ करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयां कम होती हैं। यह आरती मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। भक्तों का मानना है कि इस आरती से भगवान गणेश की विशेष कृपा मिलती है, जिससे सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं। इससे पूजा करने वालों को आत्मविश्वास और मानसिक सुकून मिलता है।
इस प्रकार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आरती न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक साधन भी है। इसलिए इस आरती का महत्व हर गणेश भक्त के लिए बहुत बड़ा है।
News Source: : Jansatta
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