सिर्फ 10 साबुत अनाज खाने से बढ़ रही बीमारियां, जौ-बाजरा-रागी भूलें नहीं

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में लोग जरूरी साबुत अनाज में से केवल 10 का ही सेवन कर रहे हैं।

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सिर्फ 10 साबुत अनाज का सेवन क्यों बढ़ा रहा बीमारियां?

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि भारत में लोग जरूरी साबुत अनाजों में से केवल 10 प्रकार के ही सेवन कर रहे हैं। यह सीमित विकल्प स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं को जन्म दे रहे हैं।

रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

रिपोर्ट के अनुसार, जौ, बाजरा, रागी जैसे पोषण से भरपूर अनाजों का उपभोग कम हो गया है। इसके बजाय चावल और गेहूं जैसे कुछ अनाजों का अधिक सेवन हो रहा है। यह विविधता की कमी पोषण में असंतुलन पैदा कर रही है और कई बीमारियों का कारण बन रही है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

साबुत अनाज शरीर को जरूरी फाइबर, विटामिन और मिनरल्स प्रदान करते हैं। जब हम केवल कुछ अनाजों पर निर्भर रहते हैं तो हमारे शरीर को अन्य जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे डायबिटीज, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। जौ, बाजरा और रागी जैसे अनाजों में खासतौर पर फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।

उपभोक्ताओं पर असर

इस रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि हमें अपने आहार में विविधता लानी चाहिए। केवल 10 अनाजों तक सीमित रहने से हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। लोगों को चाहिए कि वे जौ, बाजरा, रागी जैसे पारंपरिक और पौष्टिक अनाजों को अपनी डाइट में शामिल करें ताकि वे स्वस्थ रह सकें।

सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि लोग पोषण से भरपूर विविध अनाजों का सेवन करें और बीमारियों से बचाव हो सके।

News Source: : Jagran

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प्रश्न 1: भारत में किन अनाजों का सेवन कम हो रहा है?


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