धनबाद में बदलती जीवनशैली से बढ़े बीपी और स्वास्थ्य के खतरे
धनबाद में आधुनिक खानपान और जीवनशैली के कारण 12% लोग बीपी-शुगर से प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों में 32 बच्चे कुपोषित और शहरी इलाकों में 8 बच्चे मोटापे से जूझ रहे हैं। अनिद्रा, हृदय रोग और कैंसर के मामले भी बढ़े हैं। विशेषज्ञ असंतुलित आहार, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि को मुख्य वजह मानते हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर स्वास्थ्य सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया।
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धनबाद में तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। आधुनिक खानपान और व्यस्त दिनचर्या के चलते बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है। हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में यह पता चला है कि धनबाद के लगभग 12% लोग उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण इलाकों में 32 बच्चों को कुपोषण की समस्या है, जबकि शहरी इलाकों में 8 बच्चे मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि धनबाद में पोषण संबंधी असंतुलन भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है। कुपोषण और मोटापे दोनों ही बच्चों के विकास और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि अनिद्रा, हृदय रोग और कैंसर के मामले भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं। असंतुलित आहार, बढ़ता तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी को इन बीमारियों का मुख्य कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्याएं न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं, बल्कि समाज के लिए भी चिंता का विषय हैं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने धनबाद के लोगों से अपनी जीवनशैली में सुधार लाने की अपील की है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक तनाव को कम करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन से भी स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
धनबाद में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता जरूरी है। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुधार होगा, बल्कि पूरे समाज की स्वास्थ्य स्थिति भी बेहतर होगी।
News Source: : Jagran
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