रूस-चीन गैस पाइपलाइन योजना से भारत के दोस्त ने बढ़ाई रणनीति
रूस साइबेरिया से मंगोलिया होते हुए चीन तक गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना बना रहा है। पुतिन को उम्मीद है कि ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच चीन कीमतों पर समझौता करेगा।
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रूस ने साइबेरिया से मंगोलिया होते हुए चीन तक एक नई गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना बनाई है। इस परियोजना का मकसद रूस की ऊर्जा आपूर्ति को चीन तक बढ़ाना है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस योजना को ऊर्जा बाजार की वर्तमान अस्थिरता के बीच एक रणनीतिक कदम बताया है। पुतिन का मानना है कि इस पाइपलाइन के जरिए चीन के साथ गैस की कीमतों पर बेहतर समझौता किया जा सकेगा।
ऊर्जा बाजार में हाल के समय में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं, खासकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच राजनीतिक तनाव के कारण। ऐसे में रूस अपनी ऊर्जा निर्यात नीतियों में बदलाव कर चीन को एक मजबूत साझेदार के रूप में देख रहा है। यह पाइपलाइन न केवल रूस के लिए आर्थिक लाभदायक होगी, बल्कि चीन को भी सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराएगी।
रूस और चीन के बीच इस नई गैस पाइपलाइन से भारत की ऊर्जा रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। चीन की ऊर्जा जरूरतें बढ़ने से भारत को क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों और आपूर्ति मार्गों पर ध्यान देना होगा।
इस पाइपलाइन से रूस-चीन संबंध और मजबूत होंगे, जो दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भी बदलाव ला सकता है। भारत के लिए यह जरूरी है कि वह इस बदलाव को समझते हुए अपनी रणनीति तैयार करे।
News Source: : News18 Hindi
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