शीतला माता की आरती लिरिक्स: पूजा के बाद शीतला माता की आरती कैसे करें
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा के बाद आरती की जाती है। यहां पढ़ें शीतला माता की आरती के हिंदी लिरिक्स।
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शीतला माता की पूजा विशेष रूप से शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी के दिन की जाती है। यह पर्व मुख्य रूप से बच्चों और परिवार की सेहत के लिए मनाया जाता है। पूजा के बाद शीतला माता की आरती करना परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान माता की भक्ति और आशीर्वाद के लिए गीत गाए जाते हैं, जिससे वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।
शीतला माता को रोगों, खासकर चेचक और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। उनकी आरती करने से परिवार में स्वास्थ्य और सुख-शांति बनी रहती है। आरती के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं और माता से बीमारियों से मुक्ति की कामना करते हैं।
आरती में माता के गुणों का वर्णन होता है और उनके प्रति भक्ति भाव व्यक्त किया जाता है। आमतौर पर आरती में माता को गंध, दीप, फूल और मिठाई अर्पित की जाती है। आरती के शब्द सरल होते हैं, जो सभी उम्र के लोग आसानी से याद कर सकते हैं।
आरती के मुख्य लिरिक्स इस प्रकार हैं:
जय शीतला माता, जय शीतला माता।
दूध दही का थाल लिए, आई शीतला माता।
बीमारी दूर भगाओ, सुख समृद्धि लाओ।
जय शीतला माता, जय शीतला माता।
आरती का पाठ करने से न केवल धार्मिक कर्तव्य पूरा होता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। इससे परिवार में एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। खासकर बच्चों के लिए यह पूजा और आरती स्वास्थ्य की रक्षा का विश्वास जगाती है।
इस प्रकार, शीतला माता की आरती पूजा के बाद करने से न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
News Source: : Asianet News Hindi
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