स्मार्ट मीटर का झटका: 4 महीने में 9.7 लाख का बिजली बिल घटकर 549 हुआ

समस्तीपुर के बाघोपुर गांव में स्मार्ट मीटर से 4 महीने का 9.7 लाख रुपये का बिल आया। जांच में गड़बड़ी पाई गई और बिल घटाकर 549 रुपये किया गया।

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समस्तीपुर में स्मार्ट मीटर का बड़ा मामला

समस्तीपुर के बाघोपुर गांव में एक परिवार को चार महीने का बिजली बिल 9.7 लाख रुपये आया, जो कि सामान्य से कहीं अधिक था। इस बिल को देखकर परिवार के सदस्यों में चिंता फैल गई और उन्होंने बिजली विभाग से इसकी जांच की मांग की। जांच के बाद पता चला कि स्मार्ट मीटर में तकनीकी गड़बड़ी के कारण बिल गलत आ रहा था।

जांच में मिली गड़बड़ी

बिजली विभाग की टीम ने जब स्मार्ट मीटर की जांच की तो पाया कि मीटर सही तरीके से काम नहीं कर रहा था। मीटर की खराबी के कारण बिजली की खपत को गलत तरीके से रिकॉर्ड किया गया था, जिससे बिल बहुत ज्यादा आ गया। विभाग ने तुरंत इस समस्या को सुलझाया और बिल को संशोधित कर केवल 549 रुपये कर दिया।

इस घटना का महत्व

यह मामला स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली की सही खपत को मापना और उपभोक्ताओं को वास्तविक बिल देना है। लेकिन अगर मीटर में तकनीकी खराबी हो तो उपभोक्ताओं को गलत बिल मिल सकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है।

उपभोक्ताओं पर प्रभाव

इस घटना से उपभोक्ताओं को यह सीखने को मिला है कि अगर बिजली बिल असामान्य लगे तो तुरंत जांच करानी चाहिए। साथ ही, बिजली विभाग को भी चाहिए कि वे स्मार्ट मीटर की नियमित जांच और रखरखाव करें ताकि ऐसी गलतियां दोबारा न हों। इससे उपभोक्ताओं का विश्वास बिजली प्रणाली में बना रहेगा।

समस्तीपुर के इस मामले ने स्मार्ट मीटर के उपयोग में सावधानी बरतने की जरूरत को उजागर किया है। सही तकनीक और समय-समय पर जांच के बिना स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।

News Source: : News18

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प्रश्न 1: समस्तीपुर में परिवार को कितना बिजली बिल आया था?

प्रश्न 2: स्मार्ट मीटर में क्या समस्या पाई गई?

प्रश्न 3: बिजली विभाग ने बिल को कितना संशोधित किया?

प्रश्न 4: स्मार्ट मीटर का मुख्य उद्देश्य क्या है?

प्रश्न 5: उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए जब बिल असामान्य लगे?


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