झारखंड में ग्रहण के बीच होलिका दहन और होली की खास परंपराएं
झारखंड में 2026 की होली पर चंद्र ग्रहण के कारण 2 मार्च को होलिका दहन होगा और 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। चुटिया, लोहरदगा और खूंटी जिलों में होली के अनोखे रीति-रिवाज देखने को मिलेंगे।
स्रोत: : प्रभात खबर
झारखंड में 2026 की होली का त्योहार इस बार चंद्र ग्रहण के दौरान मनाया जाएगा। ग्रहण के कारण होलिका दहन 2 मार्च को होगा, जबकि रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। इस बार का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ ग्रहण की वजह से कुछ विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है।
चंद्र ग्रहण की वजह से होलिका दहन और होली के त्योहार के बीच दो दिन का अंतर रहेगा। 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जो कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद 4 मार्च को रंगों वाली होली धूमधाम से मनाई जाएगी। यह परंपरा झारखंड के कई जिलों में खास तौर पर देखी जाएगी।
चुटिया, लोहरदगा और खूंटी जैसे जिलों में होली के दौरान अनोखे रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। यहां के लोग पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ होली मनाते हैं। कुछ जगहों पर होलिका दहन के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जो स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाती है। यह परंपराएं समाज में एकता और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करती हैं।
ग्रहण के बीच होली और होलिका दहन का होना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ग्रहण के समय पूजा-पाठ और त्योहार मनाने को लेकर विशेष नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है। इसलिए इस बार झारखंड के लोग ग्रहण के नियमों का ध्यान रखते हुए होली का त्योहार मनाएंगे।
इस जानकारी से झारखंड के लोग सही समय पर होलिका दहन और होली की तैयारी कर सकेंगे। साथ ही ग्रहण के दौरान किए जाने वाले धार्मिक नियमों का भी ध्यान रख पाएंगे। इससे त्योहार की गरिमा बनी रहेगी और सभी लोग सुरक्षित तरीके से उत्सव का आनंद ले सकेंगे।
स्रोत: : प्रभात खबर
Continue with Google
Advertisements