रामगढ़ पतरातू में आदिवासियों की बंजर जमीन पर जैविक खेती से आय बढ़ी
रामगढ़ के पतरातू में आदिवासी परिवारों ने नाबार्ड की मदद से बंजर जमीन पर प्राकृतिक खेती कर अपनी आमदनी तीन गुना बढ़ाई, जिससे पलायन भी कम हुआ है।
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झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में आदिवासी परिवारों ने बंजर मानी जाने वाली जमीन पर जैविक खेती शुरू कर अपनी आमदनी में तीन गुना वृद्धि की है। इस पहल में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की है।
पतरातू के आदिवासी किसानों ने नाबार्ड की मदद से प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों को अपनाया है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल बंद कर दिया है और प्राकृतिक खाद और बीजों का उपयोग किया है। इससे उनकी जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ी है और वे बेहतर गुणवत्ता वाली फसल उगा पाए हैं।
पहले इस क्षेत्र की जमीन को बंजर समझा जाता था और लोग खेती करने से कतराते थे। जैविक खेती के कारण न सिर्फ मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। इससे स्थानीय लोगों का पलायन कम हुआ है क्योंकि वे अब अपने गांव में ही बेहतर जीवन यापन कर पा रहे हैं।
जैविक खेती से आदिवासी किसानों की आमदनी तीन गुना बढ़ी है, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार हुआ है। इससे उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिलने लगे हैं और उनकी आर्थिक सुरक्षा बेहतर हुई है। साथ ही, यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है।
इस सफलता से आसपास के अन्य क्षेत्रों के किसानों को भी प्रेरणा मिली है कि वे पारंपरिक खेती के बजाय जैविक खेती को अपनाएं। नाबार्ड की यह सहायता ग्रामीण विकास और सतत कृषि को बढ़ावा देने में एक उदाहरण बन रही है।
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