पश्चिम एशिया में पानी की किल्लत: इजरायल-ईरान युद्ध का असर डीसैलिनेशन प्लांट्स तक पहुंचा
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब तेल ठिकानों से बढ़कर पानी के डीसैलिनेशन प्लांट्स तक पहुंच गया है। अगर ये प्लांट प्रभावित हुए तो खाड़ी के देशों में पीने के पानी की गंभीर कमी हो सकती है। पूरी खबर जानिए।
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इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल उद्योग तक सीमित नहीं रह गया है। हाल ही में सामने आई खबरों के अनुसार, इस युद्ध का प्रभाव पश्चिम एशिया के डीसैलिनेशन प्लांट्स पर भी पड़ा है। ये प्लांट्स समुद्री पानी को पीने योग्य पानी में बदलने का काम करते हैं, जो कि इस क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी है।
पश्चिम एशिया के कई देशों में प्राकृतिक मीठे पानी की कमी है। इसलिए वे समुद्री पानी से पीने योग्य पानी बनाने के लिए डीसैलिनेशन तकनीक पर निर्भर हैं। अगर ये प्लांट्स युद्ध की वजह से प्रभावित होते हैं, तो इससे इन देशों में पानी की आपूर्ति में भारी कमी आ सकती है। खासकर खाड़ी के देश, जो इस तकनीक पर काफी हद तक निर्भर हैं, उन्हें गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अगर डीसैलिनेशन प्लांट्स प्रभावित होते हैं, तो पीने के पानी की उपलब्धता कम होने लगेगी। इससे न केवल आम जनता को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा, बल्कि कृषि और उद्योगों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पानी की कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा भी रहता है।
इस स्थिति में सरकारों और संबंधित एजेंसियों के लिए जरूरी होगा कि वे आपातकालीन जल प्रबंधन योजनाएं बनाएं और जल संरक्षण पर जोर दें। साथ ही, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए संघर्ष को जल्द से जल्द शांत करने की भी आवश्यकता है।
News Source: : Moneycontrol Hindi
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