झारखंड में राष्ट्रीय वन मेला: आदिवासी आजीविका को बढ़ावा
झारखंड वन विभाग सितंबर-अक्टूबर 2026 में राष्ट्रीय वन मेला आयोजित करेगा, जहां महुआ, शहद और बांस जैसे उत्पादों के जरिए आदिवासियों की आजीविका मजबूत होगी।
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झारखंड वन विभाग सितंबर से अक्टूबर 2026 के बीच राष्ट्रीय वन मेला आयोजित करेगा। इस मेले का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों की आजीविका को मजबूत बनाना है। मेले में महुआ, शहद, बांस जैसे वन उत्पादों को प्रमुखता दी जाएगी।
झारखंड के आदिवासी समुदाय लंबे समय से वन संसाधनों पर निर्भर हैं। महुआ के फूल, शहद और बांस जैसी वस्तुएं उनकी रोजी-रोटी का अहम हिस्सा हैं। इस मेले के जरिए उन्हें अपने उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने का मौका मिलेगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
राष्ट्रीय वन मेला आदिवासियों को सीधे अपने उत्पाद बेचने का अवसर देगा, जिससे उन्हें मध्यस्थों पर निर्भरता कम करनी होगी। वहीं, उपभोक्ताओं को प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पाद सस्ते दामों पर मिल सकेंगे। साथ ही, यह मेले वन संरक्षण और सतत विकास को भी बढ़ावा देगा।
इस आयोजन से झारखंड के वन क्षेत्र और आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा मिलेगा, जो राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में योगदान देगा।
News Source: : प्रभात खबर
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