झारखंड पुलिस हिरासत में मौत पर हाईकोर्ट ने हेमंत सरकार से मांगी रिपोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में 7 साल में 425 मौतों को लेकर हेमंत सोरेन सरकार को कड़ी फटकार लगाई और विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

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झारखंड पुलिस हिरासत में मौतों पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस हिरासत में हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने इस मामले में हेमंत सोरेन सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पिछले सात वर्षों में 425 मौतें पुलिस हिरासत में हुई हैं, जो चिंता का विषय है।

क्या है मामला?

हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में हुई मौतों की संख्या पर सवाल उठाए हैं और इस पर गंभीरता से जांच करने को कहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह जानना चाहा है कि ऐसी मौतों के पीछे क्या कारण हैं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने रिपोर्ट में मौतों के मामलों की जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पुलिस के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी मांगी है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

पुलिस हिरासत में मौतें किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए गंभीर मुद्दा हैं। यह मानवाधिकारों के उल्लंघन की संभावना को दर्शाता है और न्यायपालिका की निगरानी में सुधार की जरूरत को बताता है। झारखंड हाईकोर्ट का यह कदम राज्य में पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

नागरिकों पर इसका प्रभाव

पुलिस हिरासत में मौतों की बढ़ती संख्या से आम जनता में सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ती है। हाईकोर्ट की रिपोर्ट मांगने से उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देगी और सुधारात्मक कदम उठाएगी। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा।

अभी तक सरकार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे की कार्रवाई पर नजर बनी रहेगी।

News Source: : नवभारत टाइम्स

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प्रश्न 1: झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में कितनी मौतें बताई?


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